उत्पत्ति

भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (भा.कृ.प्र.अनु.सं0) का उदगम किसानों के खेतों पर साधारण उर्वरक परीक्षण की स्टीवर्ट योजना से हुआ है, जो वर्ष 1952-53 में प्रारंभ की गई थी, वर्ष 1955-56 में आधुनिक कृषिशास्त्रीय प्रयोग कार्यक्रम भी इसमें जोडा गया।दो घटकअर्थात आधुनिक कृषि शास्त्रीय प्रयोग तथा साधारण उर्वरक परीक्षण के साथ वर्ष 1968 में दोनों योजनाओं का अखिल भारतीय समन्वित कृषि शास्त्रीय अनुसंधान परियोजना (ए.आई.आर.ए.आर.पी.) में विलय कर दिया गया। अब से आधुनिक कृषि शास्त्रीय प्रयोग का उददेश्य उच्च आगतों के प्रयोग(उर्वरक, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, चूना आदि) से अनाज की अधिक उपज देने वाली किस्मों की प्रतिक्रिया पर अध्ययन विस्तृत हो गया है। साठ के दशक के दौरान प्रणाली आधारित अनुसंधान भी इस परियोजना में अखिल भारतीय समन्वित कृषि शास्त्रीय अनुसंधान परियोजना (ए.आई.आर.ए.आर.पी.) के रूप में शुरू किया है। हालांकि अप्रैल 1989 में कृषि प्रणाली अनुसंधान परियोजना निदेशालय मोदीपुरम, मेरठ की स्थापना फसल प्रणाली में अनुसंधान के समस्त पहलुओं को मजबूत करने के लिए की गई थी।देश में विगत वर्षो में फसल प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर अत्यंत उपयोगी कार्य पी.डी.सी.एस.आर. मेंकिया गया है। श्रेष्ठ उत्पादकता, लाभप्रदता तथा संसाधन उपयोग दक्षता, फसल प्रणाली आधारित पोषण एवं संसाधन प्रबंधन के पहलुओं के साथ क्षेत्र विशेष से संबंधित नवीन फसल प्रणाली की सूचना सृजित की गई है। अब तक पी.डी.एफ.एस.आर एवं इसके समन्वित नेटवर्क कार्यक्रमों के योगदान की उपयोगकर्ताओं एवं विकास एजेसिंयो द्वारा बहुत सराहना की गयी है। फसल विविधीकरण एवं गहनता, फसल प्रणाली प्रबंधन, स्थान विशेष पोषक तत्व प्रबंधन, संतुलित पोषण, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंध, प्रक्षेत्र मशीनीकरण, कीमती कृषि, जुताई एवं फसल स्थापना, जैविक कृषि, कृषि प्रणाली एवं संसाधन लक्षण, फसल प्रणाली क्षेत्रों का चित्रण, फसल एवं फसल प्रणाली के लिए कृषि संसाधन सूचना प्रणाली का विकास एवं शोधन एवं प्रक्षेत्र तकनीकी मूल्यांकन आदि क्षेत्रों के लिए विशेष प्रणाली आधारित तकनीको के विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है।