निदेशक की डेस्क से

कृषि प्रणाली परिप्रेक्ष्य में जलवायु को लचीला, लाभप्रद व बहु उदयमों का माडल बनाने के लिए भू भागीदारी, जल, मानव, पशु एवं सौर ऊर्जा समय की मांग है। समस्त कृषि जलवायु क्षेत्रों में कृषि प्रणाली माॅडलों के लक्षणों का वर्णन, रचना, अध्ययन एव उन्हें परिष्कृत करने की योजना की दिशा में संस्थान आगें बढ़ रहा है। हमारे सामने फसल प्रणाली अनुसंधान की उपलब्धियों को कृषि प्रणाली में रूपान्तरित करने की चुनौती है, उसी क्रम में अगले 15 वर्षो में संभावित 90 प्रतिशत से अधिक छोटें एवं सीमांत घरों के जीवन स्तर में सुधार करना है।

 विभिन्न क्षेत्रों के कृषि प्रणाली अनुसंधान के प्रारंभिक परिणामों से पता चलता है कि विभिन्न संघटनों एवं रिसाइक्लिग के माध्यम से 70 प्रतिशत तक पोषक तत्वों की आवश्यकता खेत में ही पूरी हो सकती है।हालांकि, घर की पोषण सुरक्षा की उपलब्धता के अलावा खेत की सीमाओं के भीतर समस्त आगत एवं ऊर्जा आवश्यकताओं के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि प्रणाली में आत्मनिर्भर होना चाहिए। चूंकि इसमें निर्दिष्ट उच्च स्थान एवं समर्पित बहु अनुशासित टीम शामिल है, जो पूरे क्षेत्र में आत्म स्थायी कृषि प्रणाली का विकास समय और संसाधन की खपत कर सकता है, परंतु एक बार बनने पर गरीबी, बेरोजगारी एवं कुपोषण को कम करने के रूप में राष्ट्र के दीर्घावधि लक्ष्य को पूरा करेगा। कृषि प्रणाली माडल में की गई कमियों के अंतर्गत शोधकर्ताओं को ध्यान देने की आवश्यकता है। किसान, विकास विभाग, वैज्ञानिक एवं वे सभी जो कृषि प्रणाली क्षेत्र से जुडें हुए हैं के रूप में ऐसे सभी जोखिम धारकों के लिए क्षमता निर्माण करना है जो जनशक्ति को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। संस्थान ने प्रक्षेत्र अनुसंधान ईकाईयों के क्षेत्र कर्मचारियों के लिए क्षेत्रीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला की योजना बनाई है। वैज्ञानिक, कृषि प्रणाली माॅडलों के बडे पैमाने पर अपनाने के लिए गाॅवों/जनजातीय प्रमुख क्षेत्रों में प्रशस्ति मार्ग हेतु कृषकों की भागीदारी के माध्यम सें सफल भारतीय कृषि प्रणाली माॅडल के समूह आधारित प्रदर्शन करेगें। यह आवश्यक परिवर्तन जिस पर विचार करना कठिन है परंतु आगे बढने के लिए परिवर्तन जरूरी है। हम आशा करते है कि हम कृषि प्रणाली परिप्रेक्ष्य में ठोस अनुसंधान एवं विकास के प्रयासों के साथ प्रचुर रूप में छोटे एवं सीमांत घरों का निर्माण करें।