संस्थान के बारे में

भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान की स्थापना कृषि प्रणाली अनुसंधान परियोजना निदेशालय के रूप में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा मोदीपुरम, मेरठ (उ0प्र0) में की गई। पूर्व में इसका नाम फसल प्रणाली अनुसंधान परियोजना निदेशालय था एवं सन 1968-69 में राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कृषिशास्त्र अनुसंधान समन्वय हेतु अखिल भारतीय समन्वित कृषिशास्त्रीय अनुसंधान परियोजना के रूप में संचालित किया गया। हरित क्रान्ति अवधि में प्राप्ति के बाद अस्सी के दशक के दौरान यह महसूस किया गया कि फसल अनुसंधान के घटक दृष्टिकोण उच्च कृषि स्तर के लिए पर्याप्त नही है । इसी क्रम में अखिल भारतीय समन्वित कृषिशास्त्रीय अनुसंधान परियोजना को परियोजना निदेशालय के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर प्रणाली आधारित फसल अनुसंधान के समस्त पहलुओ के स्वप्न को मजबूत करने हेतु उन्नयन किया गया।

आगे,वर्ष 2009-10 के दौरान पी.डी.सी.एस.आर का नाम परिवर्तित होकर कृषि प्रणाली अनुसंधान परियोजना निदेशालय (पी.डी.एफ.एस.आर) हो गया। कृषि प्रणाली में शोध कार्य एवं परिवर्तन में एक वर्ष लगा एवं योजना 2010-11 के दौरान प्रारम्भ हो सकी। वर्तमान में प्रणाली आधारित तकनीकों को निर्दिष्ट स्थानों पर विकसित करने के लिए मोदीपुरम में परिसर आधारित अनुसंधान के अलावा भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान अखिल भारतीय कृषि शास्त्रीय अनुसंधान परियोजना के माध्यम से 42 आन स्टेशन, 32 प्रक्षेत्र एवं 5 प्रमुख पारिस्थितिकी तंत्र जैसें- शुष्क, अर्ध शुष्क, उप आर्द्र, आर्द्र एवं तटीय प्रतिनिधित्व 15 जलवायु क्षेत्र में देश भर में फैले 5 स्वैच्छिक केंद्र संचालित किये जा रहे है। जैविक खेती पर नेटवर्क परियोजना देश के 12 राज्यों में फैले इसके 13 समन्वित केंद्रों के साथ 2004 -05 से संचालित की जा रही है। समीक्षाधीन वर्ष के दौरान कृषि प्रणाली के तरीकों पर चल रहे कार्यक्रमों के पुर्नउन्मुखीकरण पर मुख्य बल दिया जा रहा है। संस्थान के मुख्य अनुसंधान कार्यक्रमों की पहचान एकीकृत कृषि प्रणाली प्रबंधन (आई.एफ.एस.एम.), फसल प्रणाली एवं संसाधन प्रबंधन (सी.एस.आर.एम.), जैविक कृषि प्रणाली (ओ.ए.एस.), प्रौद्योगिकी अंतरण एवं मानव संसाधन विकास (टी.टी.एच.आर.डी.) के रूप में की जाती है।